278 IPC in Hindi

278 IPC in Hindi

278 IPC in Hindi

भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 278 एक महत्वपूर्ण धारा है, जो समाज को वातावरण की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाती है। वातावरण हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, यह हमें आत्मरक्षा और संभावनाओं की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है। हालांकि, हमारी लापरवाही और अनुचित व्यवहार ने वातावरण को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बना दिया है। धारा 278 आईपीसी वातावरण के हानिकारक बनाने या नुकसान पहुंचाने के अपराध को संज्ञान में लेती है। यह धारा वातावरणीय अपराधों को रोकने और उनके लिए कानूनी कार्रवाई करने का एक प्रमुख जरिया है। यह धारा विभिन्न प्रकार के अपराधों को संज्ञान में लेती है, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वन्यजीव और पारिस्थितिकीय प्रदूषण। इस धारा के अंतर्गत अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दी जाती है, ताकि वह वातावरण के साथ खिलवाड़ न करें और वातावरण को स्वस्थ्य और सुरक्षित रखने में योगदान करें।

धारा 278 क्या है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 278 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी स्थान के वायुमण्डल को इस प्रकार से दूषित करता है कि वह जो पड़ोस में निवास या कारोबार करते हों, या उस लोक मार्ग से आते-जाते हों आदि जन साधारण के स्वास्थ्य के लिए अपायकर बन जाए, तो ऐसा कार्य करने वाला व्यक्ति भारतीय कानून के अनुसार अपराधी माना जाएगा।

धारा 278 के अंतर्गत सजा का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 278 के अंतर्गत, न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए किसी लोक सेवक का साशय अपमान करना या उसके कार्य में व्यवधान डालने जैसे अपराध में अपराधी के लिए छह महीने का कारावास या आर्थिक दण्ड के रूप में जुर्माना अथवा दोनों प्रकार की सजा के लिए सरल कारावास का प्रावधान किया गया है।

अपराध

वातावरण को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाना

दण्ड

जुर्माना

अपराध श्रेणी

गैर-संज्ञेय/असंज्ञेय

जमानत

जमानतीय

विचारणीय

किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

धारा 278 की अपराध श्रेणी

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 278 के अंतर्गत किए गए सभी अपराध गैर-संज्ञेय/असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाते है। इस प्रकार के मामलों में पुलिस अदालत की अनुमति के बिना भी जाँच शुरू नहीं की जा सकती है और अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए भी वारंट की आवश्यकता होती है। धारा 278 के अंतर्गत दर्ज किए गए मामलों को किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा सकता है।

धारा 278 के अंतर्गत जमानत का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 278 के अंतर्गत किए गए सभी अपराध जमानतीय (Bailable) अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाते हैं, यानि अगर कोई व्यक्ति धारा 278 के किसी मामले में गिरफ्तार किया जाता है, तो वह तुरंत जमानत पर बाहर आ सकता है।

Offence Punishment Cognizance Bail Triable By
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