121 IPC in Hindi | धारा 121 क्या है?

121 IPC in Hindi

121 IPC in Hindi

भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 के तहत, धारा 121 एक महत्वपूर्ण और गंभीर प्रावधान है। यह धारा उन अपराधों के खिलाफ है, जिनमें कोई व्यक्ति भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना, युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना शामिल होता है। यह धारा देश की सुरक्षा और संप्रभुता को संरक्षित करने के लिए बनाई गई है।  यह केवल सीधे शारीरिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक और योजनाबद्ध युद्ध की स्थितियाँ भी शामिल हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति पर इस धारा के तहत आरोप लगाया जाता है, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ता है। सजा के रूप में, दोषी व्यक्ति को मृत्यु दंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। यह कठोर सजा देश की सुरक्षा और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए दी जाती है।

धारा 121 क्या है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 121 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करता है, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करता है या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करता है अथवा ऐसा करने का प्रयास करता है, तो ऐसा करने वाला व्यक्ति भारतीय कानून के तहत अपराधी माना जाता है।

धारा 121 के अंतर्गत सजा का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 121 के अंतर्गत, भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने या युद्ध करने का प्रयत्न करने या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करने जैसे अपराधों के लिए अपराध करने की आपराधिक साजिश करने हेतु मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास के साथ आर्थिक दण्ड के रूप में जुर्माने की सजा का प्रावधान है, जबकि किसी भी अन्य आपराधिक साजिश हेतु अपराध की सजा का निर्धारण किये गए अपराध के समान किया जाता है।

अपराध

अपराध करने की आपराधिक साजिश करना

किसी भी अन्य आपराधिक साजिश हेतु

दण्ड

मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास के साथ आर्थिक दण्ड के रूप में जुर्माना

अपराध के अनुसार

अपराध श्रेणी

संज्ञेय (समझौता करना सम्भव नहीं)

संज्ञेय

जमानत

गैर-जमानतीय

अपराध के अनुसार

विचारणीय

प्रथम श्रेणी के न्यायधीश के समक्ष

अपराध के अनुसार

धारा 121 की अपराध श्रेणी

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 121 के अंतर्गत अपराध एक किए गए अपराध करने की आपराधिक साजिश करने का अपराध एक संज्ञेय अपराध है, यानि जिस भी व्यक्ति को इसके बारे में पता हो, वह व्यक्ति पुलिस को इसके बारे में सूचना दे सकता है। इस प्रकार के मामलों में पुलिस अदालत की अनुमति के बिना भी जाँच शुरू कर सकती है और बिना वारंट के अपराधी को गिरफ्तार भी कर सकती है। ऐसे अपराधों के मामलों का ट्रायल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा सकता है। इस तरह के मामलों में समझौता करना सम्भव नहीं होता है। वहीं किसी भी अन्य आपराधिक साजिश करने हेतु किए गए अपराध संज्ञेय है अथवा नहीं यह किये गए अपराध के अनुसार ही निश्चित किया जाता है।

धारा 121 के अंतर्गत जमानत का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 121 के अंतर्गत अपराध करने की आपराधिक साजिश करने वाले अपराध गैर-जमानतीय (Non-Bailable) अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाते हैं, यानि अगर कोई व्यक्ति धारा 145 के किसी मामले में गिरफ्तार किया जाता है, तो वह तुरंत जमानत पर बाहर नहीं आ पाएगा।

Offence Punishment Cognizance Bail Triable By
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